गुरु जरुरी है,गुरुर नही !

 *सुबह की "चाय" और बड़ों की "राय"*

     समय-समय पर लेते रहना चाहिए.....

       *पानी के बिना, नदी बेकार है*

     *अतिथि के बिना, आँगन बेकार है।*

  *प्रेम न हो तो, सगे-सम्बन्धी बेकार है।*

       *पैसा न हो तो, पाकेट बेकार है।*

           *और जीवन में गुरु न हो*

               तो जीवन बेकार है।

                इसलिए जीवन में

                  *"गुरु"जरुरी है।*

                  *"गुरुर" नही"*

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